बीकानेर, 3 अप्रेल। सुयोग्य वर व मंगलमय जीवन की कामना को लेकर कन्याओं व महिलाओं की ओर से किया जा रहा गणगौर पर्व गणगौरी तीज की नजदीकता के साथ परवान पर चढ़ रहा है। शीतलाष्टमी से कन्याओं व महिलाओं ने सुबह के साथ दोपहर व शाम को गीतों की स्वर लहरियों के साथ गणगौर पूजन करने व घूड़ला घूमाने का अनुष्ठान शुरू कर दिया। वहीं महिलाओं ने घरों में गेहूं के जवांरे बोए ।
शहर के भुजिया बाजार के मथैरणों के चौक ने गणगौर बाजार का रूप ले लिया । वहीं मथैरण व अन्य पुश्तैनी सुथार, खैरादी व अन्य हस्तशिल्पी गणगौरों का रंग रोगन कर उनको नवीन रूप देने में लगे है। बड़ा बाजार, कोटगेट व शहर के अनेक इलाकों में मनिहारी की दुकानों में गणगौरों के गहने, कपड़े
व अन्य साज सज्जा सामग्री बिक्री की जा रही है। बीकानेर शहर के साथ देश के विभिन्न इलाकों में रह रहे प्रवासी राजस्थानी बीकानेर की गणगौरों को मंगवा रहे है। गणगौर-ईसर की प्रतिमाएं साइज, बनावट व श्रृंगार सामग्री के अनुसार बिक्री की जा रही है। विश्वकर्मा गेट के अंदर स्थित ईश्वर लाल माकड़ आर्ट गैलरी में गिरधर व सांवर लाल सुथार तथा एम.एम.ग्राउंड के पीछे रहने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हस्तशिल्पी गोपाल सुथार की बनाई गई गणगौर, ईसर तथा भाइये की प्रतिमाओं में हाथ,पैर सहित शरीर के सभी अंग मानवाकृति के पूर्ण रूप में होने, प्रतिमाओं के भाव देवी स्वरूपा होने से अधिक लाजबाब लगती है। इन प्रतिमाओं के गहने व वस्त्राभूषण से हर कोई तारीफ किए बिना नहीं रहता।
शीतला सप्तमी व अष्टमी से महिलाओं व बालिकाओं ने घर के पास के मंदिर में एकत्रित होकर गुलाल व रंग से जमीन पर गणगौर की देवळी बनाकर पूजन शुरू किया है। बालिकाओं में गणगौर पूजन के प्रति अधिक उत्साह नजर आता है। वे गीत गाते हुए पूजन कर रही है । घर परिवार की बड़ी बुर्जुग महिलाओं का उनको नियमित मार्ग दर्शन मिल रहा है । महिलाओं ने मंदिरों व घरों के आगे समूह में बैठकर भक्ति की तर्ज के लोकगीतों की स्वर लहरियां बिखरने शुरू कर दी है। सांझ ढलते ही मिट्टी का छेद युक्त घड़ा जिसमें दीपक जलाए हुए बालिकाएं ’’ म्हारो तेळ बळे घी घाल घुड़लों घूमला-लाजी घूमेला’’ आदि गीत गाते हुए अपने परिजनों व आस पड़ौस के घरों में घूमना शुरू कर दिया।
जूनागढ़ की जनानी ड्योढ़ी से लेकर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रा के कच्चे-पक्के सभी घरों में गणगौर पूजन का दौर श्रद्धा, आस्था तथा लोक परम्परानुसार निर्बाद्ध रूप से चल रहा है। जूनागढ़ से गणगौरी तीज पर निकलने वाली सवारी तथा ढढ्ढों के चौक में चांदमल ढढ्ढा की निकलने वाली गणगौर के साथ विभिन्न पंचायतों, व्यक्तिगत स्तर पर निकलने वाली गणगौरों के श्रृंगार आदि का कार्य परवान पर है। कीकाणी व्यासों के चौक में रहने वाले गणेश व्यास ईसर की प्रतिमा के लिए छोटे-छोटे साफे तैयार करने में मशगूल है वहीं अनेक मुस्लिम महिलाएं गणगौर के आभूषणों को मनोयोग से तैयार करने में जुटी है।

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