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Thursday, February 28, 2013


आम बजट के मुख्य बिंदु, जानिए क्या है खास


नई दिल्ली। वित्तमंत्री पी. चिदंबरम गुरुवार को संसद में अपना आठवां आम बजट पेश किया। देश में आम चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने हैं, इसलिए यह इस सरकार का अंतिम आम बजट होगा। बजट से जुड़े मुख्य बिंदुओं पर एक नजर।

ये हुए महंगे :
* एसी रेस्टोरेंट में खाना महंगा।
* सिगरेट महंगी।
* विदेशी गाड़ियां महंगी।
* मार्बल महंगा।
* फोन बिल, खाना नहीं होगा महंगा।
* चांदी हुई महंगी। चांदी पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है।
* सिल्क का कपड़ा महंगा होगा। रॉ सिल्क पर इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी हुई।
* सेट टॉप बॉक्स महंगा हो गया है। सेट टॉप बॉक्स पर इंपोर्ट ड्यूटी 10 फीसदी हुई'
*सिगरेट और संगमरमर भी महंगा। सिगरेट, सिगार पर एक्साइज ड्यूटी बढ़कर 18 फीसदी हुई।
*विदेशी कारें और बाइक भी महंगी। आयातित वाहनों और नावों पर शुल्क 75 प्रतिशत से बढाकर 100 पर्सेंट कर दिया गया है।
*2,000 रुपए से अधिक का मोबाइल हैंडसेट।
*स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहन।
*आयातित कारें और 40,000 डॉलर से अधिक कीमत के वाहन।
*800 सीसी और अधिक इंजन क्षमता की आयातित मोटरसाइकिलें
*आयातित याट और मोटर बोट।
*50 लाख रुपए से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की बिक्री।
*2,000 वर्ग फुट से अधिक अंदर के क्षेत्र वाले मकान या फ्लैट या फिर एक। करोड़ रुपए से अधिक की कीमत का घर।
*फ्लोरिंग के लिए मार्बल।
*आयातित कच्चे माल का इस्तेमाल कर बनाए गए रेशमी कपड़े, पार्किंग शुल्क।
*सोने की जूलरी, फ्रिज, हवाई यात्रा, टेलिफोन बिल, एसयूवी, बीड़ी, प्लैटिनम जूलरी, डायमंड जूलरी, रूबी, ब्रैंडेड रीटेल गार्मेंट्स, होटेल में ठहरना, लॉ फर्म की सेवा लेना, कॉस्मेटिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, स्टील, सीमेंट भी महंगे हो गए हैं।
*वकेशनल कोर्स और कृषि परीक्षण प्रयोगशालाओं को छोड़कर बाकी सभी सेवाएं सर्विस टैक्स के दायरे में।

ये हुआ सस्ता :
*बहुमूल्य रत्न
*ब्रांडेड परिधान
*आयातित सस्ती सुपारी
*ट्रक की चेसिस
* चमड़े का सामान महंगा।
* 1 अप्रैल 2016 से लागू होंगे गार के प्रावधान।
* 50 हजार तक का सामान विदेश से ला सकेंगे।
* महिलाएं एक लाख तक का सोना विदेश से ला सकती है।
* विदेशी जूता सस्ता होगा, विदेशी गाड़ियां हुई महंगी।
* चमड़ा मशीनरी पर भी ड्यूटी हटाने का प्रस्ताव।
*विदेश यात्रा से लौटने वाले पुरुषों को 50 हजार रुपए और महिलाओं को एक लाख रुपए के शुल्क मुक्त जूलरी लाने की छूट।
*जूते-चप्पल, फुटवियर और चमडे़ से बना समान सस्ता हो गया है। चमड़े के उत्पादों पर ड्यूटी घटाई गई है।
*इसके अलावा रेडिमेड कपड़े भी सस्ते।
*शराब परोसने वाले रेस्ट्रॉन्ट पर सर्विस टैक्स खत्म।

महिला, वृद्ध, बच्चे, अल्पसंख्यम और पीछड़ों के लिए :
देश में बनेगा पहला महिला बैंक
*12 प्रतिशत अल्पसंख्यकों केलिए पैसा बढ़ाने का प्रस्ताव।
* विकलांगों के लिए 110 करोड़
* माध्यमिक शिक्षा अभियान को 3983 करोड़।
* वृद्धजन स्वास्थय कार्यक्रम के लिए 150 करोड़ रुपए आवंटित
* एससी उपयोजना के लिए 41561 करोड़, एसटी उपयोजना के लिए 24598 करोड़ रुपए प्रस्तावित
* दलित आदिवासियों का पैसा उन पर ही खर्च हो
* जेंडर बजट के लिए 97134 करोड़ और बच्चों के लिए 77236 करोड़ रुपए प्रस्तावित
* युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्
* अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 3511 करोड़ रुपए।
विस्तार से जानने के लिए आगे क्लिक करें...आम बजट में अल्पसंख्य और दलितों पर खास ध्यान

खद्य सामग्री :
* खाद्य पदार्थों की महंगाई दर चिंता की बात
* कच्चा तेल, सोना विदेश से बुलाते हैं।
* तेल और दाल का उत्पादन कम हुआ।

ये हैं खास बातें :
* चीन, इंडोनेशिया से भारत आगे।
*हम दुनिया से अछूते नहीं
* पूरी दुनिया में मंदी का दौर

चिंता का विषय :
* बजट से शेयर बाजार में निराशा
* बढ़ता राजकोषीय घाटा चिंता की बात
* कम विदेशी निवेश चिंता का विषय
* चालू खाते का घाटा चिंता की बात।

हमारे लक्ष्य :
* विदेशी निवेश, कर्ज, एफआईआई तीन रास्ते।
* विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप
* अगली योजना में 8 प्रतिशत विकास का लक्ष्य।
* उंची विकास दर हासिल करना मुश्किल नहीं।
* आयात निर्यात जीडीपी का 43 प्रतिशत
* विकास दर 5 से 5.5 रहने का अनुमान
* नालंदा विश्वविद्यालय दोबारा बनाने का काम पर जोरों पर
* हमने थोक मूल्य सूचकांक 7 प्रतिशत और मुख्य मुद्रास्फिति दर 4.2 लाने का प्रयास किया।
* जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन योजना के तहत 10000 बसों की खरीद की जाएगी खाद्यान्न उत्पादन 250 टन मिलियन से ऊपर रहने की उम्मीद।
* 2009 से 12 के बीच शहरी क्षेत्रों में 12 हजार बस चलाई।
* जेएनयूआरम के तहत चलेगी 10 हजार बसे।

* पहाड़ी क्षेत्रों में चलेगी ज्यादा बसें
* कृषि क्षेत्र में लगातार सुधार
* 250 मिलियन टन से ज्यादा खाद्य उत्पादन
* बहुक्षेत्रीय कार्यक्रम के तहत जलशोधक संयंत्र 2000 आर्सेनिक और 12000 फ्लोराइड गावों में लगेंगे
* 2012-13 के लिए कुल व्यय 1665297 करोड़ रुपए नियत किया गया।
* खर्चों पर लगी लगाम, कड़वी दवा का असर हो रहा है।
* महंगाई पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
* सभी अहम योजनाओं पर पूरा खर्च किया।
* 14 लाख 30 हजार करोड़ खर्च किया।
* सभी अहम योजनाओं पर पूरा खर्च करेंगे।
* अगले साल 16.65 लाख करोड़ खर्च करेंगे।

योजनाएं :
* 11वीं योजना अविध के दौरा औसत विकास दर सबसे अधिक।
* सीएसओ ने 2012 -13 के लिए 5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान किया
* 8 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करना चुनौती।

आवंटन :
* साफ पानी के लिए 15260 करोड़
* मिड डे मिल के लिए 13215 करोड़
* मनरेगा 33000करोड़ रुपए
* प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 21 700 करोड़ रुपए आवंटित
* माध्यमिक शिक्षा अभियान को 3983 करोड़
* मानव संसाधन विकास मंत्रालय को 65867 करोड़ का प्रस्ताव
* निशक्त व्यक्तियों के लिए 110 करोड़ रुपए प्रस्तावित

बजट की विशेषताएं

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा लोकसभा में पेश 2013-14 के बजट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-

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1. महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों के लिए 97,234 करोड़ रुपए।
2. बच्चों से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 77,236 करोड़ रुपए।
3. बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1,000 करोड़ का निर्भया कोष।
4. सार्वजनिक क्षेत्र में भारत का पहला महिला बैंक बनाने का प्रस्ताव।
5. प्रत्यक्ष नकद अंतरण योजना संप्रगण सरकार के कार्यकाल के दौरान देशभर में लागू की जाएगी। 6. वित्त वर्ष 2013-14 में राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.8 फीसद रहने का अनुमान।
7. कृषि ऋण के लिए 2013-14 में 7,00,000 करोड़ रुपए का लक्ष्य।
8. पूंजी निर्माण के लिए बैंकों को 14,000 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव।
9. सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में महत्वपूर्ण वृद्धि, ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 46 फीसद वृद्धि के साथ 80,194 करोड़ रुप्ए का आवंटन।
10. शहरी आवास कोष की स्थापना का प्रस्ताव।
11. जीवन और साधारण बीमा के प्रसार में वृद्धि के लिए बहु-स्तरीय दृष्टिकोण।
12. बैंकों को बीमा ब्रोकर के तौर पर काम करने की अनुमति।
13. 10,000 तक आबादी वाले हर कस्बे में होगा जीवन बीमा और साधारण बीमा का कार्यालय।
14. पूंजी बाजार को सुदृढ़ बनाने के लिए कई प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया।
15. विदेशी निवेश के प्रवेश की प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी।
16. 25 लाख रुपए तक के आवास ऋण पर कर छूट का प्रस्ताव।
17. शेयर धारकों को वितरित लाभों पर 20 प्रतिशत की दर से अंतिम विद होल्डिंग कर का प्रस्ताव 18. 50 लाख रुपए से अधिक मूल्य वाली अचल संपत्तियों के हस्तांरण मूल्य पर एक प्रतिशत की दर से टीडीएस का प्रस्ताव।
19. कृषि भूमि में इससे छूट का प्रस्ताव।
20. 800 सीसी या इससे अधिक क्षमता के इंजन वाली मोटरसाइकलों और ऐसी नावों और जलयानों पर सीमा शुल्क मं वृद्धि का प्रस्ताव।
21. 2,000 रुपए से अधिक मूल्य वाले मोबाइल फोनों पर उत्पाद शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव।
22. सेट टॉप बॉक्स पर शुल्क पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत।
23. स्वैच्छिक अनुपालन प्रोत्साहन योजना आरंभ करने का प्रस्ताव
24. उत्पाद शुल्क और सेवा कर की सामान्य दरों में कोई बदलाव नहीं।
25. गैर कृषि उत्पादों के लिए बुनियादी सीमा शुल्क की उच्चतम दर में कोई बदलाव नहीं।
26. प्रतिभूति कारोबार कर में कटौती।
27. कर शासन आयोग का गठन किया गया।
28. रेडिमेड गारमेंट उद्योग, हस्त निर्मित कालीन, पोत निर्माण को उत्पाद शुल्क से राहत और सिगरेट, सिगार आदि पर विशिष्ट उत्पाद शुल्क पर बढ़ोतरी।
29. मंहगे मोबाइल फोन, एसयूवी पर भी उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी।
30. आयातित विलासिता वाली वस्तुओं जैसे अधिक क्षमता वाले मोटर वाहन, मोटरसाइकल आदि पर सीमा शुल्क बढ़ा।
31. पर्यावरण अनुकूल वाहनों में उपलब्ध रियायत की अवधि को बढ़ाने का प्रस्ताव।
32. विमान निर्माण, मरम्मत और जीर्णोद्धार उद्योग को भी राहत का प्रस्ताव।
33. वैध यात्रियों की आभूषण लाने की शुल्क मुक्त सीमा में विस्तार।
34. सड़क निर्माणा के क्षेत्र में विनियामक प्राधिकरण का गठन।
35. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए 37,330 करोड़ रुपए का आवंटन।
36. नया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 21,239 करोड़ रुपए का आवंटन।

चुनावों को देखते हुए लोकलुभावन बजट

सभी टकटकी लगाए पी. चिदंबरम की ओर देख रहे थे। उम्मीद थी कि वो कोई जादू करेंगे। जादू जो आम जनता और उद्योग दोनों को चमत्कृत कर दे। ...और जानकार मान रहे थे कि ऐसा जादू कर पाना बहुत मुश्किल है। मुश्किल इसलिए कि वित्तमंत्री को दो सिरों के बीच समन्वय बनाना था- एक तरफ आने वाले चुनावों को देखते हुए लोकलुभावन बजट देना
था तो दूसरी ओर आर्थिक मंदी से उबरने और गिरती विकास दर को थामने के लिए कड़े कदम उठाए जाने जरूरी थे। इन दोनों ही सिरों के बीच रस्सी बँधी थी और एक कुशल नट की तरह वित्तमंत्री को इस पर चलते हुए पार निकलना था। ....आज पेश किए गए बजट में वित्तमंत्री ने इस रस्सी पर संभलकर चलने की बजाय इस पर दौड़ने का प्रयास किया है। ..... और अभी वो पार नहीं पहुँच पाए हैं।

दरअसल हमारे यहाँ आम बजट जनआकांक्षाओं की पूर्ति का बड़ा प्रतीक बन गया है। हालाँकि पिछले कुछ सालों में उठाए गए कदमों के कारण ऐसा रह नहीं गया है। अर्थव्यवस्था को सतत चलने वाली प्रक्रिया ज्यादा प्रभावित करती है, कर रही है। आम आदमी को सीधे प्रभावित करने वाले पेट्रोल, डीजल और गैस बजट से बाहर हो गए हैं। इसके अलावा आमा आदमी की दिलचस्पी इसमें होती है कि इनकम टैक्स में क्या परिवर्तन हो रहा है और कौन-सी चीजें हैं जो सस्ती या महँगी हो रही हैं।

उस आधार पर देखें तो बजट में कुछ ख़ास नहीं है। इनकम टैक्स के स्लैब वैसे ही रखे गए हैं। हाँ 2 से 5 लाख के बीच की सालाना आय वालों को दो हजार साठ रुपए वार्षिक का फायदा जरूर पहुँचाया गया है। इसके अलावा विलासिता कि वस्तुएँ महँगी हुई हैं। 2 हजार रुपए से अधिक के मोबाइल फोन पर ड्यूटी 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। मतलब स्मार्टफोन के दीवाने अब कुछ ज्यादा खर्च करने को मजबूर होंगे। ये भी सही है कि कामकाजी लोगों के लिए ये फोन एक बड़ी जरूरत बन गए हैं और उनका बजट प्रभावित होगा।

चिदंबरम ने पतली-तनी हुई रस्सी पर तेजी से दौड़ने का प्रयास तो किया है पर वो पार निकल जाएँगे या फिसलकर नीचे गिर जाएँगे ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा
आयातित लक्जरी कारें और मोटर साइकल भी महँगी हो जाएँगी। पहला घर खरीदने वालों को 25 लाख के लोन पर 1 लाख की छूट भी राहत भरी है।
सरकार की बड़ी चुनौती ये है कि जो विकास दर आठ प्रतिशत होनी चाहिए थी वो लड़खड़ाते हुए 6 प्रतिशत पर चुकी है। इसे कैसे आगे बढ़ाया जाए। बाकी सारे आर्थिक उपाय इसी दिशा में किए गए हैं।

सवाल ये है कि विकास की ये रफ्तार सुस्त हुई क्यों? नियमों और कड़े आर्थिक उपायों की कमी पहले भी नहीं थी। कागज पर तो सबकुछ है- सवाल ये है कि जमीन पर क्या है? वित्तमंत्री कहते हैं कि करों का जो कुल योगदान जीडीपी में होना चाहिए वो नहीं है। क्यों नहीं है? इसलिए नहीं कि आपने टैक्स कम लगाया है। इसलिए है कि आप टैक्स वसूल नहीं पा रहे हैं। नौकरी पेशा के पास तो ख़ैर कोई विकल्प नहीं है पर उद्योगपतियों से प्रभावी रूप से टैक्स वसूल कर पाना सरकार के लिए अब भी बड़ी चुनौती है। जितना पैसा नौकरी पेशा कमाता है उससे अधिक पैसा कमाकर भी उद्योगपति उससे आधा भी टैक्स नहीं भरता। महँगी चिकित्सा सुविधाओं के इस दौर में सालाना 15 हजार की छूट अप्रासंगिक है। बढ़ी हुई महँगाई में सालाना 2 लाख में घर चलाना भी नौकरीपेशा के लिए बड़ी चुनौती है।

सभी चाहते हैं कि आर्थिक विकास की राह पर देश तेज गति से दौड़े। इसके लिए कड़े कदमों के लिए और अपना योगदान देने के लिए भी लोग तैयार हैं। सवाल ये है कि ये कड़ाई किसलिए है- क्या सचमुच आर्थिक विकास के लिए? या अपनी अक्षमता छुपाने के लिए? सरकार में लाखों करोड़ों के घोटाले होते रहें, सरकारी खर्चों पर लगाम लगाने कि कोई कोशिश दिखाई नहीं दे और फिर आप आम आदमी का जितना तेल निकाल सकें निकाल लें? ये कहाँ का न्याय है? आप खेती किसानी को बढ़ावा नहीं देना चाहते आपने पिछले तमाम सालों में केवल सर्विस सेक्टर यानी सेवा क्षेत्र के जरिए अपनी विकास दर बढ़ानी चाही, आपने उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया, इस सब का खामियाजा देश क्यों भुगते?

निर्भया फंड - महिलाओं के लिए 1 हजार करोड़ के निर्भया फंड का आर्थिक महत्व चाहे जो भी हो, उसके राजनीतिक और सामाजिक मायने बहुत दूरगामी हैं। एक कॉलेज छात्रा के साथ हुए बलात्कार का मामला जिस तरह एक बड़ी सामाजिक लड़ाई में तब्दील हो गया, जिस तरह हजारों युवा सड़कों पर गए, जिस तरह सत्ताधीशों की कुर्सियाँ हिलती दिखाई दीं, ये उस सब की जीत का प्रतीक है। जन आंदोलन यदि सही तरीके से खड़े किए जाएँ तो वो समाज और देश की दिशा बदल सकते हैं।

बहरहाल चिदंबरम ने पतली-तनी हुई रस्सी पर तेजी से दौड़ने का प्रयास तो किया है पर वो पार निकल जाएँगे या फिसलकर नीचे गिर जाएँगे ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

वीरेन्द्र बेनीवाल की प्रतिक्रिया

बीकानेर, 28 फरवरी।  गृह राज्य एवं यातायात मंत्राी वीरेन्द्र बेनीवाल ने केन्द्रीय आम बजट को महिला,युवा और गरीब पर खास फोकस बताया है और कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए शायद पहलीबार बजट में इतने प्रावधान रखे गए  है। उन्होंने कहा कि महिला बैंक की स्थापना के  साथ-साथ महिला निर्भर निधि की घोषणा स्वागत योग्य है।
     बेनीवाल ने कहा कि मनरेगा में ग्राम सड़क और प्रधानमंत्राी सड़क विस्तार से राज्य की ग्रामीण सड़कों का विस्तार और तेजी से होगा। मानव संसाधन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में बडी धन राशि का प्रावधान भी स्वागत योग्य है। देश के समक्ष नितप्रतिदिन आने वाली रक्षा चुनौतियां से निपटने के लिए भी अच्छा पैकेज दिया है।

लक्ष्मण कड़वासरा:आज पेश किए गए आम बजट में वित् मंत्री श्री पी. चिदंबरम ने बजट को गांव, गरीब, किसान तथा महिलाओं को समर्पित किया है। आम बजट का स्वागत करते हुए जिला देहात कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मण कड़वासरा ने कहा है कि यह बजट स्वास्थ्, शिक्षा सहित आम आदमी की सभी जरूरतों को घ्यान में रख कर कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ के नारे को चरितार्थ करता है।

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